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मध्य प्रदेश: संतजी की प्रेरणा से सात समंदर पार तक पहुंची सेवा की रोशनी, बदली हजारों जिंदगियां

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मध्य प्रदेश  Published by: Kamlesh Dewani , मध्य प्रदेश  Edited By: Yashoda Bahuguna, Date: 17/09/2026 02:43:11 pm Share:
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  • Edited By.: Yashoda Bahuguna,
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: संत नगर की प्रसिद्ध एंकर प्रिया ज्ञानचंदानी ने संतजी के बारे में बताया कि कहीं बच्चे हो रहे शिक्षित, कहीं रोगियों का हो रहा इलाज, तो कहीं बूढ़ों की हो रही सेवा

विस्तार

मध्य प्रदेश: संत नगर की प्रसिद्ध एंकर प्रिया ज्ञानचंदानी ने संतजी के बारे में बताया कि कहीं बच्चे हो रहे शिक्षित, कहीं रोगियों का हो रहा इलाज, तो कहीं बूढ़ों की हो रही सेवा। यहां संतजी ने आकर किया था अपने सपनों को साकार। अब सिद्धभाऊ सेवाधारियों के साथ मिलकर स्वामी हिरदाराम जी के बताए अनुसार विभिन्न सेवा कार्यों को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। यही कारण है कि सात समंदर पार से भी सेवा गतिविधियों में भरपूर सहयोग मिल रहा है। संत स्वामी हिरदाराम जी और उनकी प्रेरणा से जोड़ने वाली कई इमारतें संत हिरदाराम नगर ;बैरागढ़ में हैं। यह महज इमारतें नहीं बल्कि उस महान पुजारी के वह मंदिर में हैं जिनमें कहीं बच्चों को परमेश्वर का यार मानकर शिक्षित किया जा रहा है कहीं बूढ़ों की सेवा की जा रही है तो कहीं बीमारों को निरोगी काया और नेत्र ज्योति दी जा रही है। आज स्वामी हिरदाराम जी के जन्म दिवस पर कुछ ऐसे पलों से जोड़ रहे हैं जो संतजी ने साकार किए थे।


संतजी की साधना का सफर

वर्ष 1944 में एक अलग आश्रम सिंधु के भिरिया शहर में ही स्थापित किया। वर्ष 1947 जून में स्वामी जी के गुरु संत हरीराम साहिब ब्रह्मलीन हुए। कुछ समय के लिए स्वामीजी विचलित हुए। वर्ष 1947 में भारत.पाक विभाजन के वक्त स्वामी जी खाली हाथ हिन्दुस्तान आए। कुछ समय जोधपुर रहने के बाद भ्रमण करते रहे। वर्ष 1949 में स्वामीजी अजमेर के पास पुष्कर पहुंचे। वहां घने जंगल में तपस्या करते रहे। वर्ष 1956 में स्वामीजी बैरागढ़ पहुंचे और एक छोटी सी कुटिया में रहने लगे।


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