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Daughter-in-Law's Remarriage: बेटे की मौत के बाद ससुर ने कराई बहु की दोबारा शादी, गाँववालो ने की सराहना 

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मध्य प्रदेश  Published by: Shikha , मध्य प्रदेश  Edited By: Shikha, Date: 09/07/2026 04:20:35 pm Share:
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संक्षेप

मध्यप्रदेश: मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में एक परिवार ने रिश्तों की संवेदनशीलता, मानवीयता और सामाजिक जिम्मेदारी की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने लोगों का दिल छू लिया। 

विस्तार

मध्यप्रदेश: मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में एक परिवार ने रिश्तों की संवेदनशीलता, मानवीयता और सामाजिक जिम्मेदारी की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने लोगों का दिल छू लिया। जिले के जैथल गांव में एक ससुर ने अपने बेटे की मृत्यु के बाद अपनी बहू को अकेलेपन और दुख में नहीं छोड़ा, बल्कि उसे अपनी बेटी का दर्जा देकर उसका सम्मानपूर्वक पुनर्विवाह कराया। इतना ही नहीं, पिता की भूमिका निभाते हुए स्वयं उसका कन्यादान भी किया। जानिए पूरी खबर विस्तार में। 

प्रियंका के ससुर- बहू बनाकर लाया था, बेटी बनाकर विदा करूंगा

जानकारी के मुताबिक, जैथल गांव निवासी दिनेश वैरागी के पुत्र कपिल का विवाह कम उम्र में प्रियंका से हुआ था। शादी के कुछ समय बाद ही कपिल गंभीर बीमारी कैंसर से पीड़ित हो गए। परिवार ने उनके इलाज के लिए हर संभव प्रयास किए और पूरी उम्मीद के साथ उनका साथ दिया, लेकिन बीमारी से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद वर्ष 2023 में कपिल का निधन हो गया। बेटे की असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वहीं, प्रियंका के सामने भी जीवन का लंबा सफर अकेले तय करने की चुनौती खड़ी हो गई। ऐसे कठिन समय में दिनेश वैरागी ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने समाज में नई सोच का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “बहू बनाकर लाया था, बेटी बनाकर विदा करूंगा।” उन्होंने अपने इस विचार को केवल शब्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपनी जिम्मेदारी समझकर पूरा किया।

अच्छे घर में रिश्ता देख कराई प्रियंका की शादी 

दिनेश वैरागी और उनके परिवार ने प्रियंका के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसके पुनर्विवाह का निर्णय लिया। परिवार की सहमति से योग्य वर की तलाश शुरू की गई। इसके बाद विदिशा जिले के अटारीखेड़ी निवासी गोविंद से रिश्ता तय हुआ, जो खंडवा में कार्यरत हैं। दोनों परिवारों की सहमति के बाद भोपाल के एक रिसॉर्ट में पूरे रीति-रिवाज और सम्मान के साथ विवाह समारोह आयोजित किया गया। इस विवाह का सबसे भावुक पल तब आया, जब प्रियंका के ससुर दिनेश वैरागी ने उसे अपनी बेटी मानते हुए स्वयं उसका कन्यादान किया। उन्होंने विवाह की पूरी जिम्मेदारी निभाई और खर्च भी स्वयं उठाया। समारोह में मौजूद लोगों की आंखें इस दृश्य को देखकर नम हो गईं।

प्रियंका के असली पिता और गाँववालो ने की सराहना 

दिनेश वैरागी ने कहा कि पूरे परिवार ने मिलकर निर्णय लिया कि प्रियंका की जिंदगी अभी बहुत लंबी है और उसे नया जीवन मिलना चाहिए। इसलिए उन्होंने उसका पुनर्विवाह करवाने का फैसला किया और पिता की तरह उसका कन्यादान किया। प्रियंका के पिता रामबाबू ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि कोई समधी उनकी बेटी को इतना सम्मान देगा और उसे अपनी बेटी मानकर विदा करेगा। उज्जैन की यह घटना केवल एक विवाह नहीं, बल्कि समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है। यह बताती है कि रिश्ते केवल खून के नहीं होते, बल्कि प्रेम, सम्मान और अपनत्व से भी मजबूत बनते हैं। दिनेश वैरागी के इस कदम ने साबित किया है कि संवेदनशील सोच और मानवीय दृष्टिकोण समाज में नई उम्मीद पैदा कर सकते हैं।

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